अनिल और नीलम की लव स्टोरी


जहा आज कोरोना महामारी इस विश्व में एक त्रासदी लेकर आई है ,वही दूसरी और कुछ लोगो के लिए खुशियों की सोगात लेकर आई है |आज हम आपके साथ एक ऐसी कहानी लेकर आये है जो एक महान सोच को दर्शाती है |
                                                           कहते है की खुशियां ना अमीरी से मिलती है ना पैसों से | आपके मन की खुशी तो आपके अंतर्मन में ही होती है ,बस उसके महसुस करने के लिए आपके पास आस्था की ताकत,किसी के प्रति त्याग,बलिदान,दुसरो को सुखी देखकर खुद की खुशी ढूढने की ताकत आपके भीतर होनी चाहिए |

                                     आज हम बात कर रहे है नीलम नाम की  लड़की  जो सड़क पर खाना भीख में मांगकर अपना जीवन यापन कर रही थी | 
                           कहते है की समय के साथ कब किसकी बंद हुई किस्मत खुल जाए,इसका पता किसी को नहीं होता है |भिखारियों के साथ  फुटपाथ पर बैठने वाली नीलम को रोज एक अनिल नाम का लड़का जो उससे खाना बाटने आता था,उसी ने नीलम की जिंदगी में सिंदूर भरके उसे अपनी पत्नी बनाकर नीलम को  साथ फेरों के साथ सात जन्मों का बंधन बांधकर नीलम  को इस नरकिये जीवन से हमेशा के लिए आजाद कर दिया | 
चलिए आज हम आपको एक सच्चे प्यार की कहानी से रूबरू करवाते है ,
                                                            जो ना अमीरी मांगती है
                                                            ना पैसा मांगती है ,
                                                            यह तो बस एक सच्चा दिल,
                                                            नेक इंसान मांगती है |
                                                             सात जन्म भी पुरे है  
                                                             नीलम के अनिल संग 
                                                             ये दुनिया इस जोड़े के लिए 
                                                             दुआ मांगती है |
                                                             भाई के  अत्याचार की कहानी 
                                                             भाभी का दुराचार  दिखलाती है 
                                                             यह सच्चे प्यार की कहानी ||
नीलम के पिता नहीं थे वो इस दुनिया को पहले ही छोड़ चुके थे |माँ भी पेरालिसिस बीमारी से पीड़ित थी| अब नीलम का एक ही सहारा बचा था ,जिसे नीलम रक्षा का धागा आये दिन बांधती थी|   नीलम के धागे  ने तो भाई की रक्षा कर ली | माँ -बाप के बाद जिस भाई को बहन के हाथ पीले करके विदा करना चाहिए था वही भाई  लालच में अंधा बहन की रक्षा करने में असमर्थ रहा | रक्षा के धागे  के बदले पत्नी संग मिलकर मारपीट कर नीलम को घर से बाहर निकाल फेका | नीलम दर दर की ठोखरे खाने पर मजबूर हो गयी और अपनी पेट की भुख मिटाने के लिए रोटी मांगकर जीवन यापन करने लगी |

                                              एक दिन अचानक कानपूर के रहने वाले लालता प्रसाद की भेंट नीलम से हुई ,उन्होंने अपने ड्राइवर जिसका नाम अनिल था उससे कहा की ,वह रोज नीलम के साथ अन्य जरूरतमंद लोगो को खाना पंहुचा दिया करे |इस बीच अनिल लगातार 45 दिन तक नीलम व अन्य गरीब जरुरत मंद लोगो के लिए भोजन पहुचाता रहा| इस बीच अनिल और नीलम के प्यार का अंकुर फूटा | 
                   इन्ही 45 दिनों में अनिल ने नीलम से बात करके उसकी इस हालत के बारे में पुछा |इसके उपरांत अनिल ने नीलम के हालात की बात अपने मालिक लालता प्रसाद को बताई |लालता प्रसाद ने अनिल को सुबह शाम खाना पहुचाने को कहा |अनिल अपने हाथो से खाना बनाकर नीलम के पास जाने लगा और उसके मन में नीलम से शादी करने का ख्याल आया ,क्योकि वो नीलम से प्यार करने लगा |शादी करने की इच्छा अनिल में लालता प्रसाद को बताई |लालता प्रसाद ने अनिल की बात को मानकर अनिल के पिता को मनाकर नीलम की माँ की मोजुदगी में कानपूर की बुद्ध आश्रम में  पुरे रीति रिवाज के साथ दोनों की शादी करवा दी गयी  |
                             नीलम ने अपनी जिंदगी में कभी नहीं सोचा होगा की उसकी किस्मत इस तरह से बदल जाएगी | अनिल नीलम की जिंदगी में एक अवतार बनकर आया ,जिसने नीलम के नारकिये जीवन को खुशियों में बदल दिया | आज नीलम को अनिल जैसा जीवन साथी मिल गया जो उसके हर सपने को पूरा कर सकता है ||

                               वही दूसरी ओर नीलम का भाई और उसकी भाभी जो इस तरह का घटिया व्यवहार और अत्याचार करके नीलम को बेघर करके भिख मांगने पर मजबूर करने वाले कभी इंसान नहीं हो सकते |  
ऐसे लालची लोगों को इस दुनिया में रहने का कोई अधिकार नहीं है | एक भाई इतना अंधा कैसे हो सकता है ,क्या उसे उस धागे का मोल भी नहीं पता ,जिसे नीलम ने उसके हाथ पर उसकी रक्षा के लिए बांधा था | वो ये कैसे भुल गया कि पत्नी के आने से पहले बचपन में दोनों साथ खेलकर बड़े हुए थे |क्या यही उस धागे का मोल था ,जो अपनी बहन का नहीं हो सका वो दूसरों का क्या होगा |
                                नीलम की भाभी को भी  शर्म नहीं आई ऐसा  करते हुए , वो भी तो किसी घर की बेटी थी | वो भी एक महिला थी | फिर एक महिला होकर दूसरी महिला के साथ ऐसा कैसे कर सकती है |
                          
                          अनिल ने नीलम का हाथ थामकर अपने जीवन के संस्कारो,आदर्शो का अद्भुत परिचय दिया | अनिल का दिल और उसकी सोच महान है|आज के समय में अनिल जैसी सोच रखने वाले महान लोगो की जरुरत है ,जो किसी राह पर नीलम जैसी महिला को अपनी जीवन संगिनी बनाकर उसकी किस्मत को बदलकर संसार की सारी खुशिया उसकी झोली में डाल  दे | 
                                                      अनिल ने इंसान होने का अद्भुत परिचय दिया है| अनिल ने ना केवल नीलम से शादी की बल्कि हर उस महिला को सम्मान दिया है | जिसने अनिल जैसे बेटो को जन्म दिया है | धन्य है वो माता पिता जिन्होंने अनिल जैसे बेटे को पाया है |
अनिल ने नीलम का हाथ थामकर अपने जीवन के संस्कारो,आदर्शो का अद्भुत परिचय दिया | अनिल का दिल और उसकी सोच महान है |  
                                 अनिल को मेरा कोटि कोटि प्रणाम |

               Anil And Nilam Ki Love Story

Where today the corona epidemic has brought a tragedy in this world, it has brought happiness to others and some people. Today we have brought with you a story which shows a great idea.
                                                           It is said that happiness does not come from richness or money. The happiness of your mind lies in your inner being, just to feel it, you should have the strength of faith, sacrifice for someone, sacrifice, happiness of others and finding the happiness in yourself.

                                     Today we are talking about a girl named Neelam who was living on the road, begging for food.
                           It is said that no one knows about whose fate has been closed over time. A boy named Anil, who used to sit on the pavement with beggars every day, came to share food with him in the life of Neelam. By filling the vermilion and making him his wife, he tied the bond of seven births to the Sapphire together and freed Neelam from this hellish life forever.
Let us introduce you to the story of true love today
               Who does not ask for rich
               Neither asks for money,
               This is just a true heart,
               A noble person asks for it.
               Nilam Seven births are also complete
                With Anil
                This world for this couple
                Prayers Story of brother's tyranny
                Bhabi's mistreatment is shown
                This true love story ||
Neelam's father was not there, he had already left this world. Mother was also suffering from paralysis disease. Now there was only one support of Sapphire, which tied the thread of sapphire defense. Neelam's thread protected her brother. After the mother-father, the brother who should have left the sister's hand yellow and the same brother was unable to protect the blind sister in greed. Instead of the thread of defense, Neelam was thrown out of the house after beating her up with her wife. Sapphire was forced to eat chin at the rate and began to live by asking for bread to satisfy her stomach's hunger.

                                              One day suddenly Lalta Prasad, who lives in Kanpur, was met by Neelam, she told her driver, whose name was Anil, to eat Neelam along with other needy people every day. Meanwhile, Anil and Neelam for 45 consecutive days. The poor kept on delivering food to the needy people. Meanwhile, Anil and Neelam's love sprouted.
                   In these 45 days, Anil spoke to Neelam and asked about her condition. After this, Anil told Neelam's situation to her boss Lalta Prasad. Lalta Prasad asked Anil to get food in the morning. After cooking food, he went to Neelam and he thought of marrying Neelam, because he fell in love with Neelam. The desire to get married told Anilat Prasad in Anil. Lalita Prasad accepted Anil's father by accepting Anil After celebrating Neelam's mother, both of them were married with full custom at the Buddha Ashram in Kanpur.
                             Neelam would never have thought in her life that her fate would change in this way. Anil came as an avatar in Neelam's life, which changed the life of Sapphire to Narakia. Today Neelam has found a life partner like Anil who can fulfill her every dream.

                               On the other hand, Neelam's brother and his sister-in-law, who can never be a human being by making such ill-treatment and torture, make Neelam homeless and beg.
Such greedy people have no right to live in this world. How can a brother be so blind, does he not even know the value of the thread which Sapphire had tied on his hand to protect him? How did he forget that the two grew up playing together in childhood before the arrival of his wife? Was this the thread that his sister could not get, what would happen to others.
                                Neelam's sister-in-law was also not ashamed while doing so, she too was the daughter of some household. She was also a woman. Then how can you do this with another woman?
                          
                          Anil gave a wonderful introduction to the rites and ideals of his life by holding the hand of Neelam. Anil's heart and his thinking is great. In today's time, there is a need for a great people who think like Anil, who can change their fortunes by making a woman like Neelam on their path, changing their fortunes and putting all the happiness of the world in her bag.
                                                      Anil has given a wonderful introduction to being a human being. Anil not only married Neelam but also respected every woman. Who gave birth to beto like anil
Blessed are those parents who have found a son like Anil.
Anil gave a wonderful introduction to the rites and ideals of his life by holding the hand of Neelam. Anil's heart and his thinking are great.
                                  My best regards to Anil.
                                      

                                                                                 

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