इंसान का लक्ष्य, प्यार और उसका जीवनचक्र Human's goal, love and his life cycle


जिंदगी इंसान को हमेशा दोराहे पर लाकर खड़ा कर देती हैं -
पहला उसके जीवन का लक्ष्य होता है जिसमें इंसान कर्म करता है और अपने परमधाम को प्राप्त करता है और इस समय इंसान सिर्फ अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहता है। विश्व कल्याण की भावना लेकर चलता है, जिसे सारा संसार पुण्य कर्म के नाम से जानता है।
2 - इंसान का दूसरा मार्ग प्यार होता है,जिसे हासिल करना आसान नहीं होता है।  प्यार को प्राप्त करने के लिए मनुष्य को अपने बुरे अवगुणो(मोह,लालसा,हठधर्मिता आदि ) का त्याग करना पड़ता है। 
प्यार के अनेको रुप हो सकते हैं
- भक्त का भगवान के प्रति प्यार भक्ति कहलाता हैं।
- बच्चे के प्रति मां का प्यार मां की ममता कहलाता हैं।
मां अगर अपने इस प्यार का त्याग कर दे तो इस संसार से नये जीव की उत्पत्ति होना बंद हो जाएगी और पुराने जीव समय की तीव्र गति से स्वतः ही नष्ट हो जाएंगे। मां का सर्वोच्च और अद्वितीय है।  मां के द्वारा ही ये संसार का जीवनचक्र गतिमान है और मां स्त्री के प्रत्येक रूपो में विद्यमान हैं। मां का ये सारा संसार सदैव ऋणी रहेगा।

- किसी इंसान का इंसान के प्रति प्यार उसका समर्पण भाव कहलाता हैं।
- मनुष्य का किसी निर्बल जीव के प्रति उसका प्यार दयाभाव कहलाता हैं।
- मित्र का दुसरे मित्र के प्रति प्यार त्याग कहलाता हैं। ये त्याग हर किसी  के लिए सम्भव नहीं होता है। सिर्फ अपने स्वार्थ, लालच और काम के बदले किसी मित्र को याद करना भिक्षा मांगने के बराबर है।
                         एक सच्चा मित्र सदैव आपकी मित्रता प्राप्त करने के बदले अपने बहुमुल्य जीवन के क्षणों का भी त्याग कर देता है।  एक सच्चा मित्र आपसे प्यार करने के साथ -साथ आपकी रक्षा, सहयोग, इज्जत करने के साथ अपने जीवन का बलिदान कर सकता है।  एक सच्चा मित्र आपकी प्रत्येक इच्छा की पूर्ति कर सकता है ।
किन्तु जीवन के जीवन में कुछ पल ऐसे आते हैं जिसमें प्रत्येक इंसान को असहनीय पीड़ा उठानी पड़ती हैं और इन्ही पलो में मनुष्य के त्याग और धैर्य की परीक्षा चलती है। इस समय को पार कर पाना कठिन होता है किन्तु असंभव नहीं।
इस समय में मनुष्य को अपने विवेक का उपयोग करते हुए संयम के साथ इस मुश्किल समय से युद्ध करना पड़ता है और इस समय में अनेक सम्बन्धो का त्याग और बलिदान करना पड़ता है। 
              अब आप ही निश्चय करे कि आपका प्यार एक दूसरे के प्रति कैसा है?
आपके जीवन का अन्तिम लक्ष्य क्या है और आप उसे किस प्रकार प्राप्त करेंगे?
नारी के प्रति आपका नजरिया कैसा है?
                                   
                                 जीवन का सत्य प्रकाश की कलम से
Life always makes humans stand at the fork -
The first is the goal of his life in which a human being performs deeds and attains his ultimate abode and at this time the human being is only moving towards his goal. The world carries with it a sense of well-being, which the whole world knows by the name of virtuous karma.
2 - The second path of human being is love, which is not easy to achieve. To get love, a man has to sacrifice his bad qualities (attachment, longing, dogma etc.).
Love can have many forms
- Devotee's love towards God is called devotion.
- Mother's love towards the child is called mother's love.
If the mother renounces her love, then a new creature will cease to be born from this world and the old ones will automatically perish at a rapid time. The mother is supreme and unique. It is through the mother that the life cycle of the world is moving and the mother is present in every form of the woman. This whole world of mother will forever be indebted.

- A person's love for a person is called his devotion.
- Man's love for a weak body is called kindness.
- Friend's love for another friend is called renunciation. This sacrifice is not possible for everyone. Just remembering a friend in exchange for selfishness, greed and work is equivalent to begging.
                         A true friend always gives up moments of his precious life in exchange for seeking your friendship. A true friend can sacrifice his life with loving you, along with protecting, supporting, respecting you. A true friend can fulfill your every wish.
But there are some moments in the life of life in which every human being has to bear unbearable pain and in this direction, the sacrifice and patience of man is tested. It is difficult to overcome this time but not impossible.
In this time, man has to fight this difficult time with restraint using his conscience and in this time many relationships have to be sacrificed and sacrificed.
              Now you should decide how your love is towards each other?
What is the end goal of your life and how will you achieve it?
How is your attitude towards women?
                                   
                                 Truth of life with the pen of light

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